बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

दिल्ली तेरी मेट्रो में, सभी बेहाल हैं


भांति-भांति के चेहरे
भांति-भांति के लोग हैं 
दिल्ली तेरी मेट्रो में
रोज़ चढ़ते लाखों लोग हैं 

कोई जल्दबाज़ी में है, तो कोई परेशान है
सीट पाने की होड़ में
हर कोई खोता अपनी पहचान है
होते हैं वो खुशनसीब
मिल जाती जिनको सीट है
बाकियों के नसीब में
भीड़ के धक्के और तकलीफ़ है

अपनी मंज़िल तक पहुंचने में 
लड़ते सभी एक जंग हैं
लोगो की भीड़ को पार करने में 
हो जाते सभी बदरंग हैं
सुबह जो चेहरे खिले होते हैं
शाम को वो निढाल हैं
दिल्ली तेरी मेट्रो में
सभी के हाल बेहाल हैं

किसी की अपनी ख़ुशी है
तो किसी की अपनी मजबूरी 
किसी को दिल्ली अपना लेता
तो कोई दिल्ली का बन जाता है
क्यूंकि पानी है मंज़िल अगर
तो मेट्रो से ही जाना है
दिल्ली तेरी मेट्रो में
न किसी का कोई ठिकाना है

चढ़ता है यहाँ जोड़े में कोई 
तो बॉस से कोई परेशान है 
मोबाइल में इयरफ़ोन लगाकर 
सभी यहाँ अनजान हैं 
जाना है घर किसी को 
तो किसी को काम पे जाना है 
दिल्ली तेरी मेट्रो से 
लोगों का नाता पुराना है 

पल-पल बढ़ते किराये के हाथों
मजबूर है हर कोई
कोसते रहते हैं सिस्टम को
फिर भी उपाय न सूझे कोई 
सफ़र करना सबकी 
मजबूरी बन जाता है
दिल्ली तेरी मेट्रो में 
किराया कभी भी बढ़ जाता है 

ट्रैफिक का हाल देखकर 
सबको मेट्रो याद आती है 
भूल जाते है बढ़ा किराया 
बस अपनी मंज़िल याद रह जाती है 
चुप चाप चढ़ जाते हैं फिर भी 
सारी महंगाई भूल कर 
दिल्ली तेरी मेट्रो में
अब कुछ तो किराया कम कर 



सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

तेरे प्यार में हम अपना शहर छोड़ आए


तेरे प्यार में हम अपना शहर छोड़ आए
बचपन से भरा वो आँगन छोड़ आए
होती थी सुबह जहाँ आंखें मलते-मलते
माँ के आँचल में नख़रे करते-करते
ममता से भरा वो आँचल छोड़ आए
तेरे प्यार में अपना शहर छोड़ आए

जहाँ हर गली से थी पहचान मेरी
गाड़ी की रफ़्तार से होती थी बातें मेरी
कुछ दूर पर था सहेलियों का ठिकाना
हर मौके पर हो जाता था मिलना-मिलाना
सहेलियों की वो खट्टी-मीठी बातें छोड़ आए
तेरे प्यार में हम अपना शहर छोड़ आए

जहाँ होती थी शाम कभी गंगा किनारे
डूबते सूरज को निहारते थे घंटों किनारे
मिलते थे जहाँ गोलगप्पे मटर वाले 
परिवार संग लगते थे चाट के चटखारे 
हम गोलगप्पे की वो मटर छोड़ आये 
तेरे प्यार में हम अपना शहर छोड़ आए




सोमवार, 25 सितंबर 2017

फिर से...


फिर एक सुबह जीना चाहती हूँ 
तेरे प्यार में डूबकर,
फिर एक दिन जीना चाहती हूँ 
तुझसे मिलके छुपकर, 
फिर एक शाम जीना चाहती हूँ  
छत के सिरहाने बैठकर,
फिर एक रात जीना चाहती हूँ 
बातों में काटकर,
फिर एक मुलाक़ात जीना चाहती हूँ 
अजनबी बनकर 

शनिवार, 23 सितंबर 2017

थिरकते ख़्वाब


ख़्वाबों की एक दुनिया है
इस दुनिया में कई ख़्वाब हैं
करते हैं हमसे बातें 
ये अरमानों की वो किताब हैं,
ख़्वाबों को कोई तस्वीरों मैं कैसे क़ैद करे 
ये तो उड़ते हैं मन के आँगन में 
लब्ज़ बना कर ख्वाबों को कोई कैसे बयां करे,
हर ख़्वाब की ऊंची है बोली
चुकानी पड़ती है जिनकी कीमत ऊंची,
अजब हैं कायदे दुनिया के 
कोशिश करते हैं यहां सब 
ख़्वाबों को मिट्टी में मिलाने 
फ़िर भी चलते रहते हैं हम
ख़ुद के कदम दुनिया से मिलाने,
जो ख़्वाब देखते हैं बंद आंखों से
उन्हें याद रखने की कोशिश करते नहीं 
पर जो ख़्वाब देखते हैं खुली आंखों से
उन्हें खुद से जुदा होने देते नहीं,
मुठ्ठी में बंद ख़्वाबों को कर दिया है आज़ाद
फर्क नहीं पड़ता हमें अब दिन हो या रात 
हमें तो बस पूरे करने हैं अपने "थिरकते ख़्वाब"

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

ज़िन्दगी




ज़िन्दगी के सफ़र पर, नई राहों से मुलाकात हुई
रुख़ जो किया उनकी तरफ़ पहचान उनसे बनती गई 
एक सिलसिला सा बनता गया यादों का 
हर याद मुझमें अपने निशान छोड़ती गई

"ज़िन्दगी", कुछ भी लिखने के लिए यह हमेशा ही मेरी फेवरेट रही है. क्यूंकि इसमें कई रंग समाये हैं. इस एक शब्द में कई अक्षर उभर कर सामने आते हैं. इसमें कभी उतार-चढ़ाव हैं तो कभी ठहराव है. कुछ मीठी यादें हैं तो कुछ कभी न भूलने वाले पल हैं. कुछ गलतियां हैं तो कुछ सबक सीखा देने वाले लम्हें भी हैं. कभी ख़ुशी तो कभी ग़म है. कभी घना अँधेरा है तो कभी उजली रौशनी है. इसमें अनमोल रिश्ते हैं तो दगा देने वाले लोग भी हैं. यह ठोकर देती है तो दुलार कर उठती भी है. 
इसकी सबसे ख़ास बात यह होती है कि यह कभी भी एक सामान नहीं होती। सबकी अलग-अलग होती है लेकिन किसी को भी अपनी नहीं बल्कि दूसरों की अच्छी लगती है. "ज़िन्दगी" होती ही कुछ ऐसी है.  

बुधवार, 1 मार्च 2017

कैशलेस इकॉनमी

8 नवम्बर 2016, भारतीय इतिहास में वह तारीख़ जिसने भारत देश की अर्थव्यवस्था को ही पलट कर रख दिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पांच सौ व हज़ार के नोटों पर प्रतिबंध लगाने की अचानक हुई घोषणा ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. यह काले धन को ख़तम करने के लिए धन पर प्रधानमंत्री द्वारा की गयी एक सीधी चोट थी, जिसकी चपेट में हर खास व आम आदमी आ गया.

नोटबंदी के बाद से ही कैशलेस यानि बिना नकदी इस्तेमाल किये लेनदेन व खरीद फ़रोख्त की सलाह सरकार द्वारा दी जाने लगी. इसके लिए केंद्र सरकार देश में कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनायें चला रही है. लेकिन इसके बावजूद क्या भारत सचमुच कैशलेस इकॉनमी  के लिए तैयार है?

क्या है कैशलेस लेनदेन- कैशलेस इकॉनमी का मतलब होता है एक ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ पर कैश का प्रयोग ना के बराबर होने के साथ ही सभी प्रकार के लेनदेन सिर्फ व सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के ज़रिये होते हो. क्यूंकि भारत देश अभी तक भारी मात्रा में कैश का यूज़ करता आया है इसीलिए कैशलेस लेनदेन में एडजस्ट होना भारत के लिए एक बड़ी बात है. इसके लिए इन सभी माध्यमों की जानकारी होना ज़रूरी है.

Credit Card, Debit Card, IMPS, NEFT, RTGS, cheque व पेमेंट एप्स द्वारा किये जाने वाले सभी ट्रांजेक्शन कैशलेस लेनदेन का हिस्सा है. इन सभी माध्यमों के ज़रिये बिना बैंक जाये घर बैठे ही अपने खाते से किसी के भी खाते में पैसे ले या भेजे जा सकते है. चाहे तो  रोज़मर्रा के जीवन में काम आने वाली चीज़ों के लिए भी इनका यूज़ किया जा सकता है.

अपने फ़ोन में Paytm, mobikwik, freecharge, phonepe व UPI जैसी एप्लीकेशन डाउनलोड करके शॉपिंग, इलेक्ट्रिसिटी, पानी, डी2एच, बीमा किश्त आदि का पेमेंट घर बैठे ही आसानी से कर सकते है. समय के बदलते रुख को देखते हुए अब शहर के साथ कस्बों व गावों की फेमस दुकानों पर भी Paytm व  स्वाइप मशीन द्वारा लेनदेन किया जाने लगा है. इसके लिए अब जेब में हर समय कैश रखकर चलने की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी.

कैशलेस के फायदे-

पॉकेट फ्रेंडली- सरकार और Paytm, Freecharge, phonepe, व UPI जैसी कई एप्लीकेशंस समय-समय पर कस्टमर्स को कैशलेस भुगतान पर discount व cashback जैसे ऑफर्स देती रहती है. साथ ही snapdeal, flipkart, amazon जैसी कई शॉपिंग वेबसाइट्स भी है जो ऑनलाइन पेमेंट करने पर discount देती है. इससे COD पर होने वाला एक्स्ट्रा खर्च भी बच जाता है. इसके अलावा ऑनलाइन पेमेंट करने पर सभी पेमेंट का रिकॉर्ड बैंक में सेव हो जाता है. जिससे यह याद रखने की ज़रूरत नहीं की कब कहाँ और कितना खर्च किया था.

समय की बचत- कैश निकलने के लिए बैंक के चक्कर लगाने हो, एटीएम की लाइन में खड़े रहना हो या बिजली का बिल जमा करने जैसे कई काम है जिसमे हम अपनी ज़िन्दगी के अनमोल पल गवांते आये है.  कैशलेस ट्रांजेक्शन करने से हमें कैश की ज़रूरत नहीं रहती जिससे समय की काफी बचत होती है.

सिक्यूरिटी- घर पर तिज़ोरी में रखा कैश हो या फिर जेब में कैश लेकर सफर करना हो, हर समय मन में सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है. साथ ही चोरी व छीना झपटी का ख़तरा भी सर पर मंडराता रहता है.  इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन ऐसे किसी भी तरह के खतरे से हमे दूर रखते है. और अगर कार्ड खो भी जाता है तो तुरंत बैंक में फोन करके कार्ड ब्लॉक भी करवा सकते है.

टैक्स कलेक्शन- भारी मात्रा में यूज़ किया जाने वाला कैश कालेधन व भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है. जिससे सरकार को टैक्स कलेक्ट करने में समस्या आती है. देश में इनकम टैक्स देने का बोझ नौकरी पेशा लोगों पर ज्यादा पड़ता है जबकि बिजनेस क्लास अपनी आय छुपाने में काफी हद तक सफल हो जाता है. कैशलेस ट्रांजेक्शन होने पर आय व्यय की सभी जानकारी ऑनलाइन हो जाती है. जिससे सरकार द्वारा टैक्स कलेक्शन में बढ़ोत्तरी होती है.

भ्रष्टाचार- भारत जैसी बड़ी आबादी व विशाल देश में भ्रष्टाचार पर लगाम कसना आसान नहीं है. कैशलेस इकॉनमी की वजह से भ्रष्टाचार में कमी आ सकती है. क्यूंकि भारत ज्यादातर भ्रष्टाचार की गतिविधियाँ कैश में ही होती है. सरकारी महकमे में घूस देनी हो या स्कूल में एडमिशन के लिए डोनेशन देना हो, ऐसे कई काम है जो सिर्फ कैश में ही अंजाम दिए जाते है. आंकड़े बताते है कि जिन देशों ने कैशलेस इकॉनमी को अपनाया है वहां भ्रष्टाचार बेहद कम है.

कैशलेस के नुकसान-

साइबर फ्रॉड- देश में साइबर सिक्यूरिटी के पुख्ता इंतजाम ना होने से लोगों के अकाउंट से पैसे चोरी होने का खतरा बना रहेगा. हालाँकि भारत सरकार दूसरे देशों के साथ मिलकर इस पर काम कर रही है.

सेवा शुल्क- कई भुगतान जैसे कि रेलवे, मोबाइल वॉलेट पर भी कुछ फ़ीसदी तक ट्रांजेक्शन चार्ज वसूला जाता है. इसके अलावा कई क्षेत्र जहाँ पर व्यापारियों का मार्जन कम होने के कारण वह बैंक द्वारा लगाये गए शुल्क का वहन नहीं कर पाते हैं व हड़ताल जैसे कदम उठाने की धमकी देते है जिसका भुगतान आम जनता को होता है. 

अशिक्षित आबादी का शोषण- भारत देश में एक बड़ा तबका अभी भी शिक्षा से दूर है ऐसे में अशिक्षित लोगों द्वारा कैशलेस सुविधा का फायदा उठाना बहुत मुश्किल है. साथ ही देश में मौजूद असामाजिक तत्वों द्वारा इन लोगों का शोषण करना आसान होगा.  

कैशलेस लेनदेन को भारत में बढ़ावा देने पर आने वाले इन सभी फायदे व नुकसान के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कैशलेस इकॉनमी सरकार द्वारा उठाया जाने वाला एक साहसी कदम है. जिसके रास्ते में सरकार के आगे अभी कई चुनौतियाँ है. मसलन, नोटबंदी पर दूसरी राजनैतिक पार्टियों द्वारा लगातार किया जाने वाला विरोध, छोटे व्यापारियों द्वारा अभी भी कैश का यूज़ किया जाना, लोगों के अन्दर टैक्स बचने की  आदत, अशिक्षित आबादी तक कैशलेस सुविधा के माध्यमों की कमी, गावों तक इन्टरनेट व स्मार्ट फ़ोन का ना पहुंच पाना, सरकार द्वारा धन-जन योजना चलाये जाने के बाद भी गरीब तबके का बैंक में अकाउंट ना होना, साथ ही कार्ड यूज़र्स के अन्दर बैठा यह डर कि इसके यूज़ से उन्हें शुल्क के रूप में अधिक धन व्यय करना पड़ेगा जैसी कई चुनौतियाँ सामने है जिनका हल निकलने में सरकार को अधिक समय लग सकता है.    










बुधवार, 3 अगस्त 2016

जीना सिखा दिया

अंधेरों में रौशनी दी
प्यार को और भी प्यारा बनाया
तेरे प्यार ने मुझे फिर से प्यार करना सिखा दिया
मैं तो यूँ ही ज़िन्दगी जीती थी हर रोज़
परवाह नहीं थी कल की
तेरे साथ ने मुझे फिर से जीना सिखा दिया
ऊपर वाले की इनायत है या मेरा करम
जो तूने मुझको चुना
तेरी साँसों ने मेरी साँसों को फिर से चलना सिखा दिया
रहती थी एक दुनिया में
जिसे कर लिया था दीवारों में बंद
तेरे साथ ने मुझे हर बंधन तोड़ना सिखा दिया
खुद को ढूढ़ रही थी खुद में
तेरी नज़रों मे खुद को पाया
बस एक छुअन के एहसास ने
तेरी बाँहों में मुझे पिघलना सिखा दिया
रखना है खुद को पनाहों में तेरी उम्र भर
तेरे एहसास से खुद को भिगो लिया
रहकर तेरे आग़ोश में जीने लगे हम
तेरे दिल ने मेरे दिल को फिर से धड़कना सिखा दिया